पल-पल जिनगी घूटे इहवाँ

हमें घूमा द गांव सैंया,रहब ना शहर में

पल-पल जिनगी घूटे, इहवाँ रहब ना शहर में

 

गांव के माटी शहर से सुंदर,जहां पीपल के छांव बा।

शहर के एसी महल से भईया,टूटही पलानी ठांव बा।

फ्रीज से जहवाँ बढ़िया पानी, मिलेला नहर में

पल-पल जिनगी घूटे इहवाँ, रहब ना शहर में

 

धुआ शोर से दूर रहब हम,हरियाली के बीच।

बाग में कोयल कुहुके जहांवा,पपीहा गावे गीत।।

चैन के निनिया लेहब हम, आठों रे पहर में

पल-पल जिनगी घूटे इहवाँ, रहब ना शहर में

 

खेतवा में लहराइल बाली, झूमेला रोज किसान।

भारत भूमि के हम  सुंदर ,केतना करी बखान

लाल बिहारी देख नेहिया फइलल सगरो अंबर में

पल-पल जिनगी घूटे इहवाँ, रहब ना शहर में

 

  • लाल बिहारी लाल

लेखक ,कवि ,गीतकार

बदरपुर,नई दिल्ली-44

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