निर्गुन

नेहिया तोहार हउए सोनवा के गहना
ललकी चदरिया उघार$ जन सजना

सुखवा के निंदिया आइल बा पलकवा
सुखवे के बोलिया में रूकता हलफवा
सुखके मिलन बा चिक्कार$ जन सजना |

सुसुकेला काहे केहू पिटेला हो छाती
सेजिया प सुतल बानी बनी एहवाती
मिले जालीं बाबा से बिचार$ जन सजना |

जनम जे दिहल ओकर रिन रहल बाटे
पानी में पियासल जीव मिन रहल बाटे
हउए ना जुदाई हिया फार$ जन सजना |

लोकवा के लाज रहे लजिया निभइलीं
माया में भुलइलीं माया में लपटइलीं
डोलिया हो चढ़ाई के उतार$ जन सजना |

  • विद्या शंकर विद्यार्थी

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