नन्हका के संगे

अगिली में पछिली में

बरखा में बिछिली में

बनल जाव बचना , नन्हका के संगे ।।

 

बबुआ दुलारे में

कजरा लिलारे में

खनक गइल कंगना , नन्हका के संगे ।।

 

कबों जाला मुसकाय

फेर धूरि सउनाय

सजल मोर अंगना, नन्हका के संगे ।।

 

बेर बेर दुलराय

आइ गरे लिपटाय

सफल ईस रचना , नन्हका के संगे ।।

झूमल मोर सजना , नन्हका के संगे ।।

 

  • जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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