दोहा

हम त सतभाखी सखी,भनू पियरवा मोर ।
बतबल से गिरगिट हने,गावाँगाईं शोर।
 
मोर मरदवा बाँकुरा,नाँघल सरग पताल।
सबद-पाश से बान्हि के कस में कइले काल।
 
भूसा भरल कपार में,पिंगिल पढ़ल भतार।
गलथन अइसन जिंदगी समुझल ना करतार।
 
धइ दे खिचड़ी सामने फिन सझुरा दे मोंछ।
बिजना झल घरुआरिनी हे ले हेने अँगोछ।
  • दिनेश पाण्डेय
            पटना

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