देखत होई लो राँह

केतना खुशी भइल होई मन में जवना के नइखे थाँह।
हमनिन   के   तारे  आवतारे   देखत  होई   लो   राँह।।

केहू  के नाती केहू के लइका केहु के  ससुर केहू  के  बाप।
मुक्ति दिलावे चलल बाड़े ओ लो का नाँव के करत जाप।।
देखत होई लो उपर से कहत होई लो वाह……….

व्याकुलता के सीमा ना होई होई लो बेचैन।
जले जल दिहल ना जाई ली  लो नाही चैन।।
जल मिलते आत्मा तृप्त हो जाई  पितरन के पूरा होईचाँह………

एक जगही पs होई लो नाही  घुमत होई लो हर दिशा में।
जोहत होई लो उनुका के दिन दुपहरियाँ अवरु निशा में।।
कब उनुका से भेंट होई दरशइहें कब ऊ दाँह……..

घर में पूजा  पाठ  होई  आवाहन  होई  ओ  लो  के ।
पिण्डा देबे आवsतानी दियाई बोलावा ओ लो के ।।
श्रद्धा से पूर्ण सभ कार होई किरपा बरशी अथाँह………

चहल पहल होई गाँव गिराव घोड़न के होई घुड़दवल।
गाँव टोला घर घर जाके जाएँ से पहिले होई घुमवल।।
सभका अच्छा लागि नाही मुँह से ना निकली आँह………

चाँह रहे दिल में हमरा ऊ आज समय चली आइल बा।
बाबा के  गया  जी  जाएँ  के  आजुए दिन  धराइल  बा।।
खुशी के कवनो नइखे ठेकाना नाही बा दुराँह…………

सभे    जुटल   बा    घरे   आज   हमरे   बस   कमी   बा।
का बतलाई विथा हम आपन अखियाँ में बस नमी बा।।
अपना हाथे कुछो तs करति हम लेति ओमें पनाहँ………

अइला के बाद भागवत होई ओहु के समय निर्धारित बा।
सभ प्रभु  के  माया  हs  उनूके  पs  सभ  आधारित  बा ।।
दीपक तिवारी लिखले एमें तनुको नइखे जाँह……….

-दीपक तिवारी,
श्रीकरपुर,
सिवान ।

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