जीवन पानी पानी

भीतर तक जाके घुसल बा

राजनीति के तीर

टुअर बनके घुमत बाड़े

साधू सन्त फकीर I

 

उज्जर उज्जर कुरतावाला

भेड़िया उत्पात मचवले बा

थूक रहल बा सबके ऊपर

सबके नाच नचवले बा I

 

पसर रहल बा चारु देने

बारूदी बिषबेल

पर्दा के पीछे से केहू

खेल रहल बा खेल I

 

गुलमोहर के जंगल में

लाग गइल बा आग

मड़ई के ऊपर बैठल बा

आके करिया नाग I

 

कंठ नदी के सूख रहल बा

पोखर मांगे पानी

निकल गइल बा हवा हवा के

जीवन पानी पानी I

 

 

  • डॉ. हरेश्वर राय, सतना, मध्य प्रदेश

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