जिनिगी के खेवईया

गते गते बितता समइया हो
रमइया कहिया कहब बबुआ
जिनिगी के उहे बा खेवईया हो
रमइया कहिया कहब बबुआ ।।

गोदिया में जननी के सरग समाइल
अंगुरी के पोर रोज रोज पकड़ाइल
बाबूजी से बड़ ना सहईया हो
रमइया कहिया कहब बबुआ ।।

जाहि दिन मेहरी से तन लटपटाइल
ओही दिन जिनिगी के मकसद बुझाइल
खुश भइले सृष्टि के रचईया हो
रमइया कहिया कहब बबुआ ।।

आव ए सुभाष आस तोहरे बा लागल
बोल बतियाव तनि बनल बानी पागल
हाथ जोर कहेले कन्हईया हो
रमइया कहिया कहब बबुआ ।।

गते गते बितता समइया हो
रमइया कहिया कहब बबुआ
जिनिगी के उहे बा खेवईया हो
रमइया कहिया कहब बबुआ ।।

~ कन्हैया प्रसाद रसिक ~

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