जाड़ा अउर खेती

छोड़ीं अब जाड़ा के डर,
धरी रजाई अउर छोड़ीं घर ।

खेतवा में पटवनी कराईं,
हत्था- ढ़ेंकी प हाथ गरमाईं ।

पानी पड़ी त$ पाला भागी,
सब किसान के भाग जागी ।

देखीं हरियर सरसों आ गहूँ,
अईसन खुशी ना मिली कहूँ ।

कटी फसल, आनाज बेंचाई,
धन – वैभव – लक्ष्मी घरे आई ।

नाया नाया सापना बिनाई,
बाल बचन के खुशी किनाई ।

नया साल के बा ईहे अरमान,
खेती बाड़ी के जन हो नोकसान ।

अईसन कुछ करो सरकार,
सभे रहे खुश अपना घर दुआर ।

  • संजय कुमार ओझा

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