खोरी मे

हिन्दी हिन्दी उहो क़हत हौ

हिन्दी गाई खोरी मे ।

कबले बनी राष्ट्र के भाषा

कबों सुनाई खोरी मे ॥

भाषा विकास के कूल्हि रूपिया

भेंट चढ़ाईं खोरी मे ॥

हिन्दी ला बस काम करी ना

बात बनाई खोरी मे ॥

उत्तर से दक्खिन के जतरा

घूम रहल बा खोरी मे ।

पोता रहल बा करिखा सगरों

फेसबुकियाई खोरी मे ॥

आपन काम बनावे खातिर

बात बनाई खोरी मे ।

झूठ मूठ के करिया उज्जर

मत फैलाईं खोरी मे ।

मलाई वाली कुरसी खातिर

गैंग बनाई खोरी मे ।

थेथरई के नवका चक्कर

खूब चलाई खोरी मे ॥

साँझ अवध के सुबहे बनारस

फेर बताईं खोरी मे ।

भोजपुरी आ अवधी से

लूर सिखाई खोरी मे ॥

राजभाषा के राष्ट्रभाषा क

ताज पेन्हाई खोरी मे ॥

हिन्दी बने विश्व के भाषा

जुगत लगाई खोरी मे ।

  • जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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