कोठेवालियाँ

रानी के बियाह क बड़ा.शोर ह बरात बलिया से आयील ह,दश दिन पहिलवै से टेंट तम्बू लगै शूरू हो गयल ,अरे होहि के चाहि आखिर तहसीलदार साहब क पहिली बेटी बिहल जात बा,दुआरे क रौनक त देखतै बनत बा।तहसीलदार साहब खूदै हर चीज क निगरानी करत हउए।खूटा गाड़े बदे बास चाहत ह ,उदया लगत बा किआज कुल बसवरिय काट घली,इ उदया सुसुरा तहसीलदार के देखैला चार पोरसा ऊपर चढ़ जाला।अउर आज त रमेशो (तहसीलदार क भाय)आवैके हउए।रमेश बहुत दिलदार मनयी हउए ,ओनके बारे मे का-का बतावै…जब उ पढ़ै जा ओनकर किताब-कापी कँहार ले के पीछें चलै तनि मनबढ़ किसिम अउर तबियत दार आदमी..।घरे मे सब इनसे डेरायल करेला दूआरे के शान शौकत मे कउनो कमी न रहि जाय ..एकर जिमेवारी भी एन्ही के उपर बा

समय से बरात आ जायें के चाहि । काहे कि सुरूज डूबतै द्वार पूजा लग जा ,उधर घुड़दौड़ क भी पुरी तैयारी रहे।

बियाह मे घर परिवार नाता गोता सबही इक्कट्ठा भयील बा। इ उछाह देखतै बनत ह,बियाह राजी खुशी हो रहल.बा,आज दूसरा दिन जनवासा ह,गर्मी क दुपहरिया घराती बराती सब एक साथ,मुजरा शुरु भयल ये कुल में सत्येन्द्र फूफा सबसे चलाक बाढै ,उ पहिलही उ लोगन न से मिलके साँठ-गाँठ ब इठावत रहनै,कि आज सब कर जेब खाली करा देब लेकिन शर्त इहै रही जब हम जवन रूपिया लूटाइब उ हमे बाद मे दे दिया बाकि हमार जिमेदारी केहू के पान खायें भर के प इसा ना रही ओकरे जेबे मे,…रूपा खिलखिला के हँसे लगल बा रे बाबू तोहार कवनों जोड़ ना…..।महफिल क जान रहेले नृत्य अउर गायन क अदभूत मिशाल।फरमायिस पर फरमायिस अलग अलग गाना क होये लगल,रूपा भी ब हुत थक गयील लेकिन रमेश क इसारा मिलत फिर उठ खड़ी हो।करीब करीब सबके पता रहल कि रूपा रमेश क परान ह,रूपा भी रमेश बाबू के बहुत परेम करेले,ह त तवायफ लेकिन अपने प्रेम के प्रति समर्पित बा।

रूपा क एक झलक देखै बदे सेठाइन भी लालायित हयी।घरे के कुल जनाना चाहत हयी कि एक बार रूपा के हमनहू देखल जा।महफिल उठ गयील,बरात बिदा क समय हो रहल ह,रूपा भी सेठाइन से नेग लेवै कोठी मे जाले।पाँय लागु सेठानी,तोहार दरबार बनल रहे….।सेठाइन पलट के देखत हई,त समने रूपा,गजबै खुब सुरत जइसे भग वान फुर सत से गढले ह उए

अच्छा त तू रूपा ह उ…। तूही हमरे मरद के फँसले ह उ।

ना हि सेठाइन अइसे मत कही,हम उनसे प्रेम करिला, तोहरे जइसन लोग रहे त केहू क घर आबाद न हो सकेला,खीझ के ठकुराइन आपन भंडास निकलनी।अउर पइसा क गड

डी लोकाके फेकनी जा हट जा आँखि के समने से ।रूपा कहे लगल हम तोसे का लेब हम त तोहरै खायीला।रमेश बाबू के लिबर सिरोसिस ह हमरे केहन जानै शराब पिये ना देयीला डाक्टर के देखावत हयी डॉक्टर बडे हस्पताल मे देखावै के कहत ह उए लेकीन हम उहाँ नजा सकीना इहै बतावै बदे हम इहाँ मुजरा करे बदे आयल रहली ह।सेठाइन रूपा के देखतै रही गयीनी ,रूपा बडी़ तेजी से उहाँ से निकल गयील।सेठाइन अब देरी ना कयल चाहत रहनी ,आनन फानन मे तैयारी कैयके रमेश के बम्बई ले जाये बदे राजी कय लेहनी .।बम्बई पहुच के रमेश क इलाज शुरू भयील लेकिन डाक्टर हाथ खड़ा कय लेहनै लीबर पुरी तरह से सड़ गयल रहे।डाक्टर कहनै कि घरे ले जा के सेवा बरदास करा।रमेश इ बात सुन लेहनै वापसी मे रस्ते मे ही हार्टअटैक पड्ल देखतै देखत रमेश ये दूनिया से विदा हो गयीनै।सेठाइन लाश लेहले घरे पहुचनी घरे मे हाहाकार मच गयील .गांव भर के लोग सेठाइन के सांंत्वना देत रहे।रमेश के विधवा के रूप मे जवन क्रिया करम हो ला करत हयी ,रूपा के कही से पता चलेला

रोवत घिघियाते पहुचै ले…..लेकिन वो के दुत्कार के भगा देवल जाला। सबसे मिनती करेले कि एक बार उनकर मुहँ देखादा ।मगर ओके भद्दी गारी देवल जाला।चन्दा रूपाक ई हालत ना देख पआवेले कहेले चल रूपा कोठेवाली के नसीब मे इहै लिखल रहेला हमने के दुख क उनो दुख ना होला हमने त ये भले समाज मे मन बहलाँव क खेलौना हयी।चल जल्दी चल कोठा पर चाची इन्तजार करत होहिं ह ,क उनो गाहक आयल होइ…….।।

 

 

 

  • डॉ रिचा सिंह

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