कुछु पुछीं मत ए सर जी

हमरा पढ़े लिखे ना आवे
ना आवेला गावे बजावे।
रोजे इसकूल प आईना
हम आपन भूख मिटावे।
देखि रावा के जानीं हम डर जी
कुछु पुछीं मत ए सर जी
हम बानीं काँच उमर जी।
भईंस धोइना घरवा
बकरी हम चराईंना।
सानी पानी करीं हमीं
गोबरो मुत उठाईना।
माईये बाबुये घोरेले जहर जी
कुछु पुछीं मत ए सर जी
हम बानीं काँच उमर जी।
कहे ले लो क़िताब भोजन
छात्रवृत्ति ड्रेस भेटाई।
पढ़बे भा ना पढ़बे
बाकी होई कुछ कमाई।
माई बाबु के अतने फिकर जी
कुछु पुछीं मत ए सर जी
हम बानीं काँच उमर जी।
पहाड़ा के नाव सुनि
लागि जाला झाड़ा।
गिनती गिनाईं कइसे
पेन्हले नइखीं डाँड़ा।
पाँएट बहि लागी लउकी चुतर जी
कुछु पुछीं मत ए सर जी
हम बानीं काँच उमर जी।
A B C D देखीये के
दिमाग मोर सटकल।
क ख ग घ आवेला
उहो भुलाइल भटकल।
आँख से आवे ना अछर नजर जी
कुछु पुछीं मत ए सर जी
हम बानीं काँच उमर जी।
भुखे पिआसे रोज
इसकुलिया मे आईना।
पलखत पावते हम
रसोइये ओर धाईना।
पेट धइले बानीं परब उफर जी
कुछु पुछीं मत ए सर जी
हम बानीं काँच उमर जी।
खा लिहनीं खिचड़ी
अब छुटि दीहीं जाईं।
आईल बाड़े अगुआ
जाके करीं सेवकाई।
जलदी छोड़ीं हम जाईं घर जी
कुछु पुछीं मत ए सर जी
हम बानीं काँच उमर जी।
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✍विमल कुमार
ग्राम +पोस्ट-जमुआँव
थाना-पीरो,भोजपुर,बिहार

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