ओसहीं बा

बड़का बड़का राज बिलाइल
राम के कुटिया ओसहीं बा
मशीन के मुँह में बरध समाइल 
घुघुर घँटिया ओसहीं बा

सुगना रहस अलोता सबसे बनल रहे चउपहल
घाट घाट क पानी पढ़ के रहे छिंटाइल महल
तबहू उडल आकाश भवन से
थरिया लुटिया ओसहीं बा
बड़का बड़का राज बिलाइल
राम के कुटिया ओसहीं बा।।

बद बोली से जिनिगी में ना बरकत होई
अहं बढ़ी तऽ आपन आपा अपने खोई
धधकत ज्वाला जुगुनू बनल
नाम नरेटिया ओसहीं बा
बड़का बड़का राज बिलाइल
राम के कुटिया ओसहीं बा।।

चंदन लकड़ी चिता बोझाइल
का केहू के समझ में आइल ?
चार से चौबीस बनल हमेशा
शून्य के खटिया ओसहीं बा
बड़का बड़का राज बिलाइल
राम के कुटिया ओसहीं बा।।

घर के खा के भोंगा भइले
ताकत आइल भाग परइले
हार थाक के घर अइले त
माँ के गोंदिया ओसहीं बा
बड़का बड़का राज बिलाइल
राम के कुटिया ओसहीं बा।।

  • कन्हैया प्रसाद रसिक

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