इयाद रहबू – तीस्ता

जर से दूर होखल त हर बेटी के नियति होला हमनीके समाजिक ताना बाना के अनुसार । बेटी के जनमला के साथे साथ माई बाबू परिजन लाग जालन बेटी के बिदाई कइसे नीमन से होखी येह फिकिर में । एकर तैयारी त बेटी के जनमते शुरू हो जाला हमनीके समाज में ओइसने कवनो बाप के बेटी के डोली में बिदा कइला के जगहा आपन करेजा के टुकड़ा के अर्थी के कान्हा देवे के पर जाव त ओह बाप के पहाड़ जइसन दुःख क कल्पना भी आँखियन से लोर ढरकावे खातिर काफी बा कवनो पोढ़ करेजा के इंसान के भी । अइसने दारुण दुख के साथ गलबहियां करे के परल २८ अगस्त,२०१८ के छपरा के रिविलगंज के प्रसिद्ध स्वनाम धन्य लोकगायक अउरी संगीतकार उदय नारायण सिंह जी के, बेटी रहली “अनुभूति शांडिल्य तीस्ता” ।

उहे तीस्ता जवन महज १३ साल के कांच उमिर में ८० साल के आजादी के बीर सिपाही बाबू कुवंर सिंह के गाथा मनमोहक अंदाज में गा के प्रस्तुति दिहली देश के राजधानी दिल्ली में मौका रहे दिल्ली भोजपुरी मैथली अकादमी के लोक उत्स्व के शायद उ साल रहे  २०१५, अक्टूबर के तीसरा हफ्ता रहे शायद जहां तक हमरा इयाद परता ।   ओह कार्यक्रम में हमरो शामिल होखे के मौका मीलल रहे दर्शक के रूप में । बीतल समय सिनेमा के रील नियर आँखि के सोझा जीवंत हो गइल हमरा स्मृति पटल प । कइसे बीर कुंवर सिंह के गाथा गावे वाली कलाकार के अचानक अनुपस्थिति के चलते तीस्ता के इ किरदार के मंच प प्रस्तुत करे के परल । हमनीके त सपनो में ना सोचनी जा की तीस्ता के इ पहिलका प्रस्तुति ह उहो बिना ख़ास तैयारी के कलाकार के अनुपस्थिति में, इ रहस्य के त अब हमनीके जनली ह जा मीडिया में आइल खबर पढ़ के, काहे की उनके मंच प देख के लगबे ना कइल की इ उनकर शुरुवात ह कुंवर बीर सिंह गाथा गावे के, गजब के आत्म बिस्वाश रहे तीस्ता में एगो सधल कलाकार नियन प्रस्तुति । उनकर गाथा सुन के उम्मीद के नावा किरण लउकल तीस्ता में भोजपुरिया समाज के की एक दिन जरूर भाग बहुरि भोजपुरी के । लेकिन शायद बिधना के इ मंजूर ना रहे तबे न असमय काल के गाल में समा गइली आ उम्मीद परवान चढ़े ले पहिलही ओकरा पर पानी फिर गइल ।   कुछ गिनल चुनल नावन में तीस्ता एगो नावँ रहे साफ़ सुथरा भोजपुरी गायकी में ।

तीस्ता अइसन समय में लोकगीत संगीत के बाहँ धइली, जब लोकसंगीत के प्रस्तुत करत गायक कलाकार लोग दरसक श्रोता खातिर झनकत रहे आ ऑर्केस्टा के अश्लील द्विअर्थी गीत के बोल प ठुमका लगावत कलाकार के दर्शन खातिर भीड़ हुमञ्च के उपचत रहे । पंडाल में मुण्डे मुंड लउके। उहो एगो पुरान गाथा पुरनिया बाबू कुंवर सिंह क मंचन एतना सुंदर ढंग से प्रस्तुति की दर्शक चुंबक नियन बंध के रह जांस । गजब के अंदाज रहे गाथा के गावे के । तीस्ता के गायन आ डफली लेके के मंच प घूमी घूमी के आत्म बिस्वाश के साथे प्रस्तुति करत देखी के उनकरा मे तेजन बाई क साक्षात दर्शन होखे ।  खनकत आवाज, नपा तुला सधा अभिनय उमिर से बढ़ी के संजीदगी । भोजपुरी के आस जागल आपन येह बेटी से ।

बीर कुंवर सिंह के नेवता के गजब अंदाज में बतावे वाली आ आपन सुंदर आवाज से दर्शक के रग रग फड़कावे वाली ओह पुरान समय के जीवंत करे वाली तीस्ता के बीमारी के खबर सुनके भोजपुरिया समाज पूरा देश के बाउंड्री के तुर विदेश तक ले गोल पार्टी बंदी से ऊपर उठी के जगत के पालनहार से दुवा रूपी जाल से उनकर जिनगी के रोकल चहलस बाकी कहाँ सफल भइल ? मउवत के आज तक ले के रोक पवले बा जे अब रोक पाइत भगवान तीस्ता के अपना लगे बोला लिहलन । तीस्ता के गइला से खाली भइल जगह क पुरती एतना आसान त नइखे ।  आजो भोजपुरी क मौजूदा हालत केहू से छुपल नइखे, अश्लीलता क आंधी भोजपुरी क जर के हुलसा के राख देले बिया । मुरझा गइल बा कला जगत आपन इ कलाकार के असमय अचके गइला से ।

बहुत कम समय क साथ मिलल तीस्ता क भोजपुरिया समाज के । लेकिन जवन उम्मीद के अलख जगवली उ लोकसंगीत क, उ भोजपुरिया समाज कबो ना भुला पाइ । आज तीस्ता सशरीर त नइखी हमनीके बिच में लेकिन उनकर गावल बीर कुवंर सिंह गाथा हमनीके इयाद में उनके हमेशा ज़िंदा राखी । जगत के पालनहार से दसो नोहं जोर के निहोरा बा की दिवंगत आत्मा के शांति दिहिं अउरी अपना असीम प्रकाश में समाहित करीं । तीस्ता के बहाव के रोकल कहाँ सम्भव बा इ त अनवरत बही ………. लोर भरल अँखियन से तीस्ता के हियरा से श्रद्धांजलि बा ।

 

## तारकेश्वर राय “तारक”

ग्राम + पोस्ट : सोनहरियाँ, भुवालचक

जिला : गाजीपुर, उत्तरप्रदेश

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