आपन बात

आजू के भागमभाग दौर में भोजपुरी के पत्र-पत्रिका चलावल कवनो खेल ना ह. आज जब पठनीयता कम भइल जात बा आ लोग आभासी दुनिया में आकंठ डूबल जा रहल बा एह बीचे आपन उहे आभासी मंच पर उपस्थिति दर्ज करावल उहो, नियमित रूप से कवनो ठठ्ठा बात ना कहल जाई. भोजपुरी साहित्य सरितालगातार एह दिसाई आपन प्रासंगकिता बनवले बा. बहुत थोडके समय में बहुत साहित्यकार लोगन के एगो लमहर जमात खड़ा में जहवां उ सफल बा उहें रोज ब- रोज नया कलमकार के देश-विदेश से खोजे में सफलो भइल बा. एह खोज में इन्टरनेट के जाल बड़ा सहायक भइल बा. दुनिया में भोजपुरिया के संस्कृति जिन्दा बा एकर इ प्रमाण बा.

भारत जइसन देश में जहाँ अलग अलग रंग रूप, भेष-भूषा आ खल-बेखल के संस्कृति बा त जाहिर बा भासो अनेक होई आ बढलो बा. आजु दुनिया में जवन पूंजीवाद के बड़ा जोर बा, एक ध्रुवीय सत्ता यानि अमेरिकाराइजेसन के फैलाव बा आ मिडिया के रेलमपेल बा, जब दुनिया में बहुत छोटहन छोटहन भाषा मुअत बाड़ी सन आ मुआवे के काम चल रहल बा ओह दौर में भोजपुरी भारत का दुनिया के सबसे तेज बढे वाला भाषा बन गइल बिया.इ एगो शुभ संकेत बा. एकर पर विस्तृत अध्ययन भारत के प्रमुख भाषाविद प्रो गणेश एन देवी जी एनडीटीवी के प्राइम टाइम कार्यक्रम में एंकर रविश कुमार के जबाब में दिहले रहीं, वइसे त देवी जी के संस्था पीपल्स लिंगविस्टिक सर्वे ऑफ़ इण्डिया आज से तीन साल पहिले आपन देशव्यापी भाषाई सर्वेक्षण के बाद मिलल परिणाम में इ बात के घोषणा कइले रहे जवन किताबरूप में अब मौजूद बा जेकर प्रकाशन भारत के लमहर प्रकाशक ओरिएंट ब्लैकस्वान कइले बा.

एगो बात के पुष्टि शिकागो विश्वविदयालय में साउथ एशिया लैंग्वेज के विशेषज्ञ प्रो विटनी कॉक्स भी करत बानी आ बतावत बा कि भोजपुरी भाषा के विकास में इंटरनेट आ भोजपुरी सिनेमा के विस्तार के अहम योगदान बा. अइसन उर्जावान शोध हमनी के इ-पत्रिका के प्रकाशित करे के सोच के मजबूती प्रदान कर रहल बा आ तमाम उ भोजपुरी भाषी एकरा ला बधाई के पात्र बाडन जे आपन माई भाखा ला इन्टरनेट पर एगो साकारात्मक तरीका से भोजपुरी के विकास, प्रचार आ प्रसार में आपन तन मन आ धन से सक्रिय बाडन.

9 अगस्त के भोजपुरी जन जागरण अभियान के दिल्ली के जंतर मंतर पर 7 वां धरना प्रदर्शन भइल जेकरा में एक सूत्री मांग रहे – ‘भोजपुरी के संविधान के आंठवी अनुसूची में शामिल कइल जाव’. जेकरा देश के अलग अलग कोना से भोजपुरी के प्रेमी, साहित्यकार, पत्रकार, नेतागण आ युवा लोगन के संगे संगे महिला लोगन के बढ़ चढ़ के भाग लिहले . एकरा में बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, गुजरात, असम, मुबंई आ पश्चिम बंगाल के लोगन के संगे संगे दिल्ली आ एनसीआर के भोजपुरिया भाई बहिन के उपस्थिति भोजपुरी के सांविधानिक मान्यता के जोर पकड़े के सबूत दे रहल बा. सरकार के कान लगे हमनी के जब ले एह मांग ले चिल्लाए के होखी चिल्लात रहब जब ले मांग पूरा ना हो जाए.

आजू सिंगापुर विश्वविदालय में भोजपुरी भाषा के ऊपर शोध हो रहल में जेकरा में कोफ़ी याक्पो  आ पीटर मुयेस्किन के टीम सूरीनाम, मॉरिशस आ कैरेबियन देसन में जा के शर्तबंध मजदूरन (जवन 1917 ई में खतम हो गइल) भाषा के सामाजिक आ ऐतिहासिक अध्ययन कर रहल बा, पूरा अध्ययन हमनी का एगो ठोस निष्कर्ष ले के आई अइसन हमार मानल बा.

भोजपुरी साहित्यिक पत्रिका में आलोचना के नया दृष्टिकोण के विकास के लगातार विकास के जरूरत बा जवन भोजपुरी साहित्य में मौजूद तत्व के सोझा ले के आई आ ओकरा से नया पाठक वर्ग तैयार होई ओकरा पता चली की भोजपुरी साहित्य में अद्यतन का चल रहल बा इ समय के मांग बा. समीक्षा के आयाम के आउर विस्तार देवे पर काम होखे आ आज जवन धारा विश्व साहित्य के सृजन हो रहल बा ओकरा संगे हमनी कान्हा से कान्हा मिला के चले के पड़ी तबही हमनी के साहित्य बरियार होई आ केहू दोसर भाषा के साहित्य के समक्ष हमनी के गरब से खड़ा हो सकब. हम इ बात के जरूरत तबे समझनी जैसे कबीर बाबा के बीजकके लिंडा हेस आ सुखदेव सिंह मिल के अंग्रेजी में अनुवाद कइले बा आ ओकरा पर आलोचनात्मक आलेख लिखले बा लो. एही किताब के पांचवा अध्याय में उ बतावत बा लोग की आदरणीय अहमद शाह बतावत बानी कि कबीर के बीजक ठेठ भोजपुरी में बा काहे कि उहाँ के मोताबिक कबीर के बीजक में बनारस, गोरखपुर आ पूर्वी मिर्ज़ापुर के भाषा के प्रयोग बा अब इ साफ हो जाता कि इ एह क्षेत्र में कवन भाषा बोलल जाला.

एह अंक में भोजपुरी कविता, कहानी, समीक्षा, अनुवाद, लघुकथा, व्यंग्य के संगे संगे एगो भोजपुरी हिंदी के मूर्धन्य भाषाविद इतिहासवेत्ता प्रो राजेन्द्र प्रसाद सिंह से भोजपुरी भाषा पर दिलीप कुमार के इंटरव्यू बा जवन भोजपुरी के महत्व के रेखांकित कर रहल बा.

भोजपुरी साहित्य सरिता के सम्पादन मंडल के सभे संगी साथी के ऊपर हम उ तमाम कलमकार लोगन के आभार करत बानी जे हरेक महीना बिना नागा के आपन रचना भेजि पत्रिका के सुचारू रूप में चलावे में योगदान दे रहल बानी, बिना उहाँ सभे के सहयोग के इ साहित्य आन्दोलन अधूरा बा उहाँ सभे के योगदान रेघियाये जोग बा.

विशेषकर श्री जे पी द्विवेदी जी के एह पत्रिका में सक्रीय भूमिका के उल्लेखित ना कइल जाए त इ साहित्यिक बेइमानी कहल जाई. उहाँ के ऊर्जा हमनियो के सक्रिय बना देवे ला इहे समपर्ण एगो पत्रिका के जिनगी दे सकेला.

पत्रिका रउरा सभे के सोझा बा अब रउरा न्याय करीं आ आपन विचार से अवगत कराई. इहे भाव आ सनेह के संगे ……..

राउर आपन

  • संतोष पटेल

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