आइल चुनाव

जंगल मे हड़कम मच गइल
सबही अचानक साधू भइल
दुआ बंदगी हाथ जोड़ी के
सब लोगन के शीश झुकउल
घूम घूम के सब जंगल मे
लागल करय जुड़ाव…….
ऐ बबुआ लागता कि आइल चुनाव

शेर करय खरगोश से यारी
बिल्ली चुहन के महतारी
साँप नेवला गठबंधन कय
पड़ल हर जुगाड़ पे भारी
के, केकरा के देई पटकनी
सोचत बा ऊदबिलाव…..
ऐ बबुआ लागत कि आइल चुनाव

मोर के सँग सियार है नाचत
तेंदुआ बकरी के फुसिलावत
मगरमच्छ बानर मिलकर के
थल, जलचर में सेंध लगावत
मछली कछुआ बन्द अब करिह
नदियां क ई बहाव…..
ऐ बबुआ लागत कि आइल चुनाव

शाकाहारी बाज हो गइल
लोमड़ी सज्जनता में खो गइल
काँव काँव सुनी के कौआ के
कोयल जाने कहाँ खो गइल
उल्लू के सब मान के नेता
पूजय लागल पाँव…..
ऐ बबुआ लागत बा कि आइल चुनाव

सभा भइल जंगल मे भारी
बात करे सब बारी बारी
उल्लू कहा अगर मैं जीता
कर दूंगा पट्टा सरकारी
शोषित बंचित साथ रहे त
मिल जाई बढ़िया भाव…
ऐ बबुआ लागत कि आइल चुनाव

-अरविन्द राय….

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