अन्हरिया मे हलचल भइल

भोरहीं उग्गल किरिनियाँ के भाग

अन्हरिया मे हलचल भइल ।

 

तारीख पचीस आ पूस महिनवाँ

माई भारती क रहे शुभ दिनवाँ

लीहलें अजुवे मदन अटल राग

अन्हरिया मे हलचल भइल ।

 

छनकल केहरो केहू के मनवाँ

भइलें हुलास उमगल अंगनवाँ

चंहकल गोइड़ा के हरियर बाग

अन्हरिया मे हलचल भइल ।

 

मदन जरवने काशी ज्ञान दियरी

पोखरण विस्फोट, पहिनी पियरी

दहकल दुनिया मे भारत के आग

अन्हरिया मे हलचल भइल ।

 

भोरहीं उग्गल किरिनियाँ के भाग

अन्हरिया मे हलचल भइल ।

 

  • जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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